अक्रूर ने कृष्ण की वंदना करके भक्ति की पूर्णता प्राप्त की।

akrura
नेहा!
25 Mar 2019

प्रश्न: जब हम सुनते हैं कि अक्रूर ने कृष्ण की वंदना करके भक्ति की पूर्णता प्राप्त की, तो हम यह भी सुनते हैं कि वह सत्राजीत की हत्या में फँसे हुए थे। हम अक्रूर की इन दो विपरीत बातों में कैसे सामंजस्य बैठायें?

रोमपाद स्वामी का उत्तर: कृष्ण बुक में श्रील प्रभुपाद जी जीव गोस्वामी का हवाला दिया हैं: “जीव गोस्वामी जैसे महान अधिकारियों द्वारा दिया गया उत्तर यह है कि यद्यपि अक्रूर एक महान भक्त थे, लेकिन ब्रजवासीयों के बीच से कृष्ण को निकाल के ले जाने के कारण उन्हें ब्रजवासीयों ने श्राप दिया था। ब्रजवासियों की भावनाओं को आहत करने के कारण अक्रूर को पापियों द्वारा रचित साजिश में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया था। इसी तरह, कृतवर्मा एक भक्त थे, लेकिन कंस के साथ घनिष्ठ संबंध के कारण, वह पाप से दूषित हो गए थे, और वे भी इस साजिश में शामिल हो गए थे”। हमारे आचार्य यह भी टिप्पणी करते हैं कि अक्रूर और कृतवर्मा भगवान पर अपने भाई प्रसेन को मारने और स्यमन्तक मणि को चुराने के आरोप में सत्राजीत से बहुत नाराज थे; वे बदला लेना चाहते थे और इसलिए सतधनवा को, जो कि बहुत दुष्ट माना जाता था, सत्राजीत को मारने के लिए कहा।

यह सब कृष्ण के योगमाया की सहयोग से हुआ। इस व्यवस्था के द्वारा कुछ कार्यों को पूरा किया गया: अपराधियों को उनकी किए की सज़ा मिलीं, आक्रामक सत्राजित दुष्ट सतधनवा द्वारा मार दिया गया, जोकि खुद भगवान द्वारा मारा गया था। स्यमंतक को सतधनवा द्वारा दिए जाने के बाद, कृतवर्मा और फिर अक्रूर दोनों कृष्ण के डर से द्वारका छोड़ दिए। अक्रूर कई वर्षों तक काशी में रहे (कृष्ण से अलग होने के गोपियों के श्राप को पूरा करते हुए, जैसा कि गोपियों को भी अनुभव करना पड़ा) जब तक कि कृष्ण ने उन्हें द्वारका में हो रही अनियमितताओं और आपदाओं के बारे में अफवाहों को दूर करने के लिए उन्हें वापस नहीं बुलाया, जो द्वारकावासियों ने महसूस किया है उसको केवल स्वफल्का के पुत्र, अक्रूर द्वारा ही क्षीण हो सकता है।

सनातन गोस्वामी द्वारा बृहद भागवतामृत में वृंदावन से कृष्ण और बलराम को अक्रूर के ले जाने की लंबी चर्चा है। अपने भगवान के लिए गोपियों की तीव्र भावनाओं के कारण, अक्रूर कृष्ण को उनसे दूर करने के लिए धोखे या झूठ का उपयोग करते है (जैसा कि इसे व्रजवासीयों ने देखा था)। अक्रूर का धोखेबाज़ प्रतीत होना गोपियों द्वारा उन्हें कोसने का कारण है। #शिक्षा: भक्तों को बहुत सावधान रहना चाहिए कि हम एक दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। चूँकि हम सभी कृष्ण भावनामृत के विभिन्न स्तरों पर हैं, कृष्ण हमारे साथ उसी अनुसार व्यवहार कर सकते हैं, हालाँकि परिस्थितियाँ कुछ असामान्य या असुविधाजनक लग सकती हैं और समय के साथ बाहर भी हो सकती हैं।

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