आज़ादी के बाद मंदिरों और वेदिक संस्कृति को किसने लूटा?

आज़ादी के बाद मंदिरों और वेदिक संस्कृति
वेदास!
21 Dec 2019

एक नज़र:- आज़ादी के बाद मंदिरों और वेदिक संस्कृति को किसने लूटा?

कितनी दुःख की बात है कि हिंदुओ को पता ही नहीं है कि जो सरकार मंदिर को अपने हाथ में ली है उन मंदिरों के पैसे उसी मंदिर को ही नहीं मिलते है। इन मंदिरों के पैसे से ही सरकार मुस्लिमों को हज कराती है, मंदिरों के ही पैसे से सरकार मस्जिद, चर्च और मदरसे खोलती है।

ये है झूठे सेक्युलरिज़म का नाटक!! बिचारे हिंदूओं को लगता है सरकार मंदिर चला रही है तो अच्छा काम कर रही है। लेकिन उनको ये नहीं मालूम कि मंदिरो को लूटने का जो काम गजनवी जैसे मुस्लिम आतंकी लोग नहीं कर पाए लेकिन उसी काम को आज़ादी के बाद से कांग्रेस सरकार ने बड़ी ही आसानी से कर दिखाया और इस बात का हिंदू जनता को आजतक पता भी नहीं चला है कि कैसे वो छल लिए गये।

काफिर हिंदू लोगों को इस झूठे सेक्युलरिज़म का नाटक भी नहीं पता जो बचा खुचा था ऊपर से हिंदी फ़िल्मों में मुस्लिम आक्रांताओं की दबदबी ने हमारे मंदिरों के फ़िलाफ एवं मंदिर के पुजारियों को एक खलनायक की तरह प्रस्तुत करके उनके ख़िलाफ़ इतना उल्टा सीधा दिखाया कि हिंदू सच मान बैठे। और उसका फ़ायदा उठाकर एक तथाकथित झूठा सेक्युलर वर्ग मंदिर के ख़िलाफ़ ही एक बड़ी मोर्चा खोल बैठा है। इनको अपने ही मंदिरों में सारी बुराई नज़र आने लगी और मदिर से नाता तोड़ दिया और फिर विधर्मी हो गये और विधर्मी संतानें पैदा करने लगे। अंततः हिंदू की स्थिती धोबी के कुत्ते से भी बुरी हो गयी जोकि न तो घर का रहा ना तो घाट का। इन तथाकथित सेक्युलर हिंदू काफिरों को ये भी नहीं मालूम की कैसे ये स्वयं अपनी वेदिक संस्कृति से दूर हो गये और होते जा रहे है तथा दूसरों को भी दूर करने का अभियान चला रखा है। शास्त्र के मामले में ये गूँगे और बहरे होते गए। इनके इसी गूँगे बहरेपन का फ़ायदा उठाकर बड़ी ही चतुराई और आसानी से ज़ाकिर नाइक जैसा आतंकी इनको गुमराह करके इनका ख़तना करा देता है और इसमें ये बहुत गर्व भी महसूस करते है। उसके बाद भी हिंदुओ के पास कुछ बचता है तो पैसे देके या इनको डरा धमका करके बड़ी ही आसानी से इनका धर्म परिवर्तित करा दिया जाता है।

जागरूकता तब आएगी जब हम अपने शास्त्र से जुड़ेंगे और सारे शास्त्रों का निचोड़ और सारे धर्मों का निचोड़ (भगवदप्रेम) अकेले श्रीमद भगवद्गीता में बहुत ही सरल तथा वैज्ञानिक तरीक़े से दिया गया है। अगर हम सही ढंग से सही स्रोत से भगवद्गीता का अध्ययन करें तो पाएँगे कि सम्पूर्ण विश्व को, सम्पूर्ण मानवता को शांति और प्रेम का ज्ञान देने वाला यही शास्त्र है। ईश्वर और जीव तथा उनके सम्बन्धों का वास्तविक ज्ञान भी इसी शास्त्र में निहित है जोकि मानवता के लिए परम वरदान है।

इतना ही नहीं भगवद्गीता हमें जीवन जीने की शैली तथा जीवन की विपरीत परिस्थितियों में कैसे एक सच्चा नेता बन सके सिखाता है। जीवन में आए उतार-चढ़ाव, सुख-दुःख, अमीरी-ग़रीबी, हार-जीत, हानि लाभ, सफ़लता-असफलता जैसे द्वंदो को धीरता के साथ मानसिक संतुलन को खोए बिना इनको ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार करते हुए कैसे जीवन के शिखर पर आगे बढ़ें ये हमें भगवद्गीता सिखाता है। इसीलिए प्रत्येक अभिभावकों को अपने बच्चों को बचपन से ही इसकी शिक्षा देनी चाहिए ताकि वो सही राह पर चल सकें और जीवन में आयी अनेकानेक चुनौतियों का निर्भीकतापूर्वक सामना करते हुए जीवन के शिखर पर पहुँच सके। इसके लिए अत्यंत आवश्यक पहलू ये है की पहले माता पिता या अभिभावकों को भगवद्गीता के महत्व का ज्ञान होगा तभी तो वो अपने बच्चों को इस अमूल्य संस्कृतिक धरोहर का ज्ञान दे सकेंगे।

हरे कृष्ण

Rajesh Kumar Pandey

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