भगवान चैतन्य की दया प्राप्त करना।

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पार्थ!
25 Mar 2019

भगवान चैतन्य की दया प्राप्त करना (रोमपाद स्वामी 2015):


भगवान चैतन्य क्या देने आए थे? वह इस जगत में पवित्र नाम के जप की प्रकिया को देने के लिए प्रकट हुए, किंतु विशेष रूप से शुद्ध नाम। और शुद्ध नाम के माध्यम से ब्रज प्रेम प्राप्त करना, जो पहले किसी अन्य अवतार ने नहीं दिये थे। यही हमारी प्रार्थना है, क्या यह नहीं है?

“नमो महा-वदन्याय कृष्ण-प्रेम-प्रदायते।
कृष्णाय कृष्ण-चैतन्य-नाम्ने गौर-त्विशे नमः।।”

 

यद्यपि वे हैं - वैसे भी। वह उस विशेष अमूल्य वस्तु को देने के लिए आये थे; ब्रज प्रेम। पवित्र नाम के जप के माध्यम से ब्रजवासियों के भाव में कृष्ण-प्रेम। और पवित्र नाम, शुद्ध नाम, शुद्ध पवित्र नाम प्राप्त करने के लिए हमें उस कृपा को प्राप्त करने की आवश्यकता है जो वह देने के लिए आये थे। और उन्होंने जिन उपदेशों को दिया, जिन पर भगवान चैतन्य ने जो कुछ भी शिक्षा दी, जिस आधार पर उन्होंने पवित्र नाम का वितरण किया था, उसकी जड़ें कहाँ है- कहाँ उनकी जड़ें हैं? श्रीमद्भागवतम् में। उन्होंने सिर्फ हवा में से कुछ नहीं निकाला और कहा "अरे यहां कुछ अच्छी शिक्षाएं हैं।" इसकी जड़ें श्रीमद्भागवताम् में हैं, या इसकी व्याख्या, उनकी शिक्षाएं श्रीमद्भागवताम् का विवरण है, जो वेदांत सूत्र पर टिप्पणी है, जो सभी वेदों का सार है। इसीलिए वेद भी यही बात सिखाते हैं। लेकिन उन्होंने इसे बहुत आसानी से उपलब्ध कराया। इतना सुलभ कि कोई भी, शाब्दिक रूप से कोई भी व्यक्ति पवित्र नाम का जाप कर सकता है, भले ही आप बोल न सकें, आप अपने मन में जाप कर सकते हैं। लोग कभी-कभी पूछते हैं कि बहरे लोगों के बारे में क्या ख़याल है। लेकिन आप जानते हैं कि वे भी सुन सकते हैं। आत्मा सुन सकती है। यह आध्यात्मिक कान है, न कि केवल ये (कानों को इंगित करते हैं)।

 

“परम विजयते श्रीकृष्ण संकीर्तनम्” कलियुग में यह संकीर्तन आंदोलन मानवता के लिए परम वरदान है। इसीलिए सदा ही भगवान श्रीकृष्ण का नाम जपिए “हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।” और ख़ुश रहिए।

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