भगवान रामजी का स्नेही स्वभाव

ram ji ki kahani
राजेश पाण्डेय, पीएच॰डी॰ !
19 Mar 2019

भगवान रामजी का स्नेही स्वभाव (सप्ताह के निर्देश):

“भगवान राम सभी की सेवा स्वीकार करते हैं। उन्होंने कैकेयी से कहा, "यह मेरा स्वभाव है। मैं हर किसी से परस्पर आदान-प्रदान करता हूँ। जैसा वे मेरे प्रति शरणागत होते हैं, तदनुसार मैं उन्हें प्रतिफल देता हूं"
भक्ति के सभी विभिन्न उक्तियों का मुख्य लक्ष्य भगवान कृष्ण या रामचंद्र से जुड़ना है। उसके प्रति आसक्ति होने का अर्थ उसकी प्रीति-पूर्वक सेवा करना है। हमारी क्षमता के अनुसार, जो भी कृष्ण ने हमें दिया है, हमें उनको तुष्ट करने की कोशिश करनी  चाहिये। श्रवण और कीर्तन के द्वारा उनके प्रति सेवा की भावना को मजबूत करना हमारा प्राथमिक कर्तव्य है।"

भारतवर्ष में नवंबर 2017 में परमपूज्य रोमपाद स्वामी के प्रवचन  “अयोध्या यात्रा के समापन" नामक शीर्षक से संकलित.

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