धर्मयुध महाभारत पर मेरे विचार

धर्मयुध महाभारत पर मेरे विचार
वासुदेव:!
11 Aug 2018

महाभारत का युद्ध आज से लगभग ५,७०० वर्ष पूर्व हुआ था और धर्म की स्थापना और अधर्म का विनाश करने के लिए भगवान कृष्ण के द्वारा इसकी रचना की गयी थी | परंतु कलयुग में फेली बहुत सी भ्रांतियों के कारण इस युद्ध को वो सम्मान नहीं मिल पाया जिसके ये लायक था | मैंने तो लोगों को ये तक कहते सुना है है की जिस घर में ये महाकाव्य स्थापित होता है वो घर क्लेश का गढ़ बन जाता है जो की बहुत ही ग़लत है | जिस महाभारत ने हमें गीता जैसा पवित्र संवाद दिया हो उसके बारे मैं ऐसा कहना सराहनिये नहीं है | अगर हम महाभारत के बारे में ऐसा कुछ बोलते हैं तो हम कहीं ना कहीं उसकी और उससे जुड़ी हर वस्तु की आलोचना कर रहे हैं बिना कुछ सोचे समझे और उसमें गीता भी सम्मलित है | 

हम अपने अज्ञान के कारण ही महाभारत जैसे महान महाकाव्य की आलोचना करते हैं | महाभारत हमारे स्वर्णिम इतिहास का हिस्सा है जो अगर ना होता तो जो विश्व हम आज देख रहे हैं वो कदापि वैसा ना होता | मैं इस ब्लॉग से ये उजागर करना चाहता हूँ की आख़िर महाभारत हुआ क्यूँ था | आख़िर क्यूँ अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध लड़ने के लिए उत्साहित किया | आख़िर वो धर्म सिद्धांत क्या थे जिसकी वजह से भगवान कृष्ण चाहते थे की अर्जुन महाभारत का युद्ध पूरी तत्परता से लड़े |

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महाभारत का युद्ध की सबसे बड़ी वजह थी पांडवों का साथ कौरवों द्वारा किया गया अन्याय | धर्मराज युधिष्ठिर जो की अपनी प्रजा के लोकप्रिय राजा थे उनसे उनका राज्य छिन लिया गया | दुर्योधन की शर्त थी की पांडव १२ वर्ष का वनवास करें और एक वर्ष अज्ञातवास में बितायें और अगर वो ये सब करने में सफल रहते हैं तो वो उन्हें उनका राज्य लौटा देगा पर क्या ऐसा हुआ ? पांडवों ने अवधि पूरी की और जब उन्होंने अपना राज्य वापस माँगा तो दुर्योधन ने साफ़ माना कर दिया | जब भगवान कृष्ण ने दुर्योधन से  प्रार्थना करी की तुम केवल पाँच गाँव पांडवों को दे दो तो उसने यहाँ तक कह दिया की वो एक सुई धरती भी वापस नहीं करेगा | धर्मराज युधिष्ठिर कोई मामूली क्षत्रिय नहीं थे  और  ना ही कोई ब्राह्मण जो अरण्य में अपने परिवार के साथ निवास कर लेते भिक्षा माँग माँग कर | वो एक समृद्ध राज्य के राजा थे जिनका सम्मान भंग कर दिया गया था | क्षत्रिय का धर्म होता है की अगर कोई उसका राज्य छल से प्राप्त कर ले तो उसके लिए लड़ना | उदाहरण के लिए जब कोई आपकी धरती को छल से छीन ले तो आप भी उसके लिए कुछ भी करोगे क्यूँकि किसी की धरती को छल से लेना अधर्म है | क्षत्रियों का धर्म है की वो उसके लिए युद्ध और बचे हुए वर्ण राजा से न्याय का पालन करने की अपेक्षा करे अगर उनके साथ ऐसा होता है |

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महाभारत के युद्ध का एक बहुत बड़ा कारण था द्रौपदी का सम्मान | द्रौपदी एक पूजनिए स्त्री थी और उसके साथ जो कौरवों ने किए वो किसी भी समाज के लिए चिंताजनक था | जितने कष्ट द्रौपदी ने सहे उतने शायद ही किसी ने महाभारत की कथा में सहे होगे | भारी सभा में जब दुशासन ने उसे निर्वस्त्र करना चाहा तो भगवान कृष्ण ने उन्हें बचाया | पूरी सभा केवल मुक़दर्शक बनी रही और एक स्त्री के सम्मान को खोते हुए देखती रही | पांडव तो धर्म से बंधे हुए थे पर बड़े बढ़े महायोद्धा और वृद्ध व्यक्ति जैसे द्रोणाचार्य , भीष्म पितामह ने कुछ नहीं बोला |कर्ण ने तो द्रौपदी को वैश्या तक कह दिया | जो समाज इस तरह का बर्ताव करे उसे जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं | स्त्री को हमेशा से पूजनिए कहा गया है सनातन धर्म में और अगर स्त्री के साथ इतना सब कुछ हो तो समाज को एक होकर अभियुक्त को दंड देना चाहिए |

ये कुछ कारण थे जिससे मैं सोचता हूँ की महाभारत का युद्ध केवल सही नहीं परंतु समाज के संदेश था | जब भी आपके साथ अधर्म हो या स्त्री के सम्मान को ठेस पहुँचें तो आपको युद्ध लड़ना चाहिए अपना सम्मान पाने के लिए | स्त्री पूजनिए है और महाभारत का केंद्र भी एक स्त्री थी जिसके सम्मान को ठेस पहुँचाने का प्रयास किया गया था और भगवान कृष्ण ने उसे बचाया था महाभारत के युध के तात्पर्य से | मैं तो अंत में ये ही कहूँगा की सब इसे एक बार अवश्य अध्यन करे ||

 

|| धन्यवाद ||

 

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