गणेश जी तीनो लोको के समस्त विघ्नों का नाश करने हेतु शक्ति कहां से प्राप्त कर रहे हैं?

vedashindi
राजेश पाण्डेय, पीएच॰डी॰ !
14 Sep 2018

गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ!! 

 

गणेश जी तीनो लोको के समस्त विघ्नों का नाश करने हेतु शक्ति कहां से प्राप्त कर रहे हैं? श्री ब्रह्म संहिता के अध्याय 5 श्लोक 50 में ब्रह्माजी भगवान कृष्ण की प्रार्थना कर रहे हैं ...

 

यद्द पाद पल्लवयुगम विनिधाय कुंभः।

द्वंद्व ऐ प्रणामसमये स गनाधिराजा

विघ्नान विहन्तु मलमस्य जगतत्रययस्य

गोविन्दम आदि पुरुसं तम अहम भजामि।।

 

तीनो लोको के समस्त विघ्नों का नाश करने हेतु शक्ति प्राप्त करने के उद्देश्य से जिनके चरणकमलों को श्री गणेश अपने मस्तक के दोनों कुम्भो पर धारण करते है।उन आदिपुरुष गोविंद का मैं भजन करता हुँ।

 

इस श्लोक के तात्पर्य में श्रील भक्ति सिद्धातं सरस्वती ठाकुर समझाते हैं... सांसारिक समृद्धि के लिए सभी बाधाओं को नष्ट करने का अधिकार गणेश जी को सौंपा गया है, जो अपने पूजन के योग्य उपासकों द्वारा पूजित होते हैं। सगुण ब्रह्मरूप पंचदेवों में  उन्होंने पद प्राप्त किया है। यह गणेश एक भगवद-शक्त्याविष्ट देवता हैं। उनकी सारी महिमा पूरी तरह से गोविंद की कृपा पर निर्भर है।

 

गणेश जी सभी बाधाओं को दूर करते हैं। गणेशजी भगवान नरसिम्हदेव के चरण कमलो को अपनी सूँड़ से पकड़ हुए हैं जिनसे उनको सभी बाधाओं को नष्ट करने की शक्ति प्राप्त हैं। नरसिम्हदेव जी भगवान श्रीकृष्ण के अवतार है जिनका रूप आधे शेर  और आधे मनुष्य के जैसा है जिन्होंने प्रह्लाद महाराज के पिता, हिरण्यकश्यपु राक्षस का वध किया था। श्रील रूप गोस्वामी जी ने भक्ति-रसामृत सिंधु में गणेश जी की पूजा का उल्लेख किया है (भक्ति-रसामृत सिंधु के अध्याय 8, को देखें)। किंतु श्रील प्रभुपाद जी द्वारा उनके शिष्यों को इसकी संस्तुति की गयी है कि गणेश जी की पूजा करने के बजाय भगवान नरसिम्हदेव की पूजा करें ताकि वे अपने भक्ति में हो रही बाधाओं को दूर कर सकें। क्योंकि यदि हम अग्रिम भक्त नहीं हैं और फिर भी भौतिकता से जुड़े हैं तो भगवान गणेश की पूजा करने से यह संभव है कि हम इस भौतिक जगत में उलझ जाएंगे। भगवान नरसिम्हदेव की पूजा करने से, जिनसे गणेश जी शक्ति प्राप्त कर रहे हैं, वही वास्तविक रूप में विघ्न-विनाशक है और वो कृष्ण के अवतार भी है।इस तरह उनकी पूजा करने से हम भगवान गोविंद (कृष्ण) की ही पूजा कर रहे हैं और हम भक्तिमार्ग से विचलित भी नहीं हो रहे हैं। भले ही हम भौतिकता से जुड़े हुए हैं फिर भी भगवान नरसिम्हदेव की कृपा से हम भक्ति में आगे बढ़ेंगे। उनकी कृपा से ही हमारी भक्ति की सभी बाधाओं को हटा दिया जाएगा। तथा अंत में हम उनकी ही कृपा से मानव जीवन की सर्वोच्च पूर्णता जो कि शुद्ध भगवद-प्रेम है को प्राप्त करेंगे!!

 

हरे कृष्ण

 

डॉ. रामानन्द दास 

 

“हमें हमेशा ही भगवान विष्णु की महिमा का श्रवण, कीर्तन और स्मरण करना चाहिये” 

 

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। 

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।

 

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