कंठी माला क्यों पहनते हैं ?

tulsi mala
नेहा!
29 Sep 2018

भगवान श्री विष्णु (श्री कृष्ण) को पूर्ण श्रद्धा एवं दृढ़ता से अपना सर्वस्व मानने वाले वैष्णव भक्त गले में तुलसी की कंठी माला क्यों पहनते है? क्या शास्त्रों में कही कंठी माला पहनने के लिए इसका वर्णन है? क्या केवल दीक्षित भक्त ही कंठी माला पहन सकते है या कोई भी कंठी माला पहन सकता है ?

शास्त्रों में कई जगह इसका उल्लेख है कि जो लोग अध्यात्मिक उन्नति करना चाहते है उन्हें कंठी माला पहननी चाहिए l 

पद्म पुराण में कहा गया है – जो लोग तुलसी की कंठी माला पहनते है और अपने शरीर पर 12 स्थानों पर चन्दन का तिलक करते है वे भगवान विष्णु (कृष्ण) के उपासक होते है और वैष्णव कहलाते है l उनकी उपस्थिति से सारा ब्रम्हांड शुद्ध होता है और अपनी उपस्थिति से ऐसे भक्त किसी भी स्थान को वैकुण्ठ की तरह शुभ बना देते है l “

स्कन्द पुराण में भी कहा गया है – “ जो लोग गोपी चन्दन से अपने ललाट और शरीर  को भूषित करते है और गले में कंठी यानि कि तुलसी माला धारण करते है उन्हें यमराज के दूत छु भी नहीं पाते l”

श्रीमद भागवतम  में अजामिल के प्रसंग में अपने पढ़ा ही होगा की यमराज अपने दूतो से कहते है की – “मेरे दूतो तुम मेरे पुत्रो के समान हो और मै  तुम्हे यह समझा देना चाहता हूँ कि तुम लोग कभी किसी वैष्णव को लेने पृथ्वी लोक मत जाना। वे भगवान के भक्त है और मृत्यु के उपरांत उन पर हमारा कोई अधिकार नहीं बनता l 

कंठी माला सभी धारण नहीं कर सकते केवल वे भक्त जो चार नियमो का पालन करते है वे ही कंठी माला धारण कर सकते है l 
चार नियम है –
 1) मांसाहार न करना
2) किसी भी प्रकार का नशा न करना
3) जुआ न खेलना
4) अवैध स्त्री / पुरुष गमन न करना

यदि आप इन  नियमो का पालन करते है और 11 या कुछ  माला हरे कृष्ण महा मन्त्र का जप करते है  तो आप कंठी माला पहन सकते हैl 

श्रील प्रभुपाद जी के अनुसार, जो दीक्षित भक्त है उन्हें ३ घेरो में कंठी माला पहनना चाहिए किन्तु जिनकी दीक्षा नहीं हुई है वे एक या दो घेरे की कंठी माला पहन सकते हैं।

हमारा पहनावा हमारी  सोच को प्रभावित करता है इसलिए यदि आप कंठी माला पहनते है और जहा संभव हो वहा तिलक धारण करते है तो इस प्रकार आप स्वयं को दुसरो के समक्ष भक्त के रूप में प्रस्तुत करेंगे इसप्रकार भक्ति दृढ होगी और निषिद्ध कर्म नहीं होंगे l 

आशा है इस जानकारी से भक्ति में आप को लाभ मिले।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे

हरे कृष्ण

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