क्या श्री चैतन्य महाप्रभु भगवान हैं और इस तथ्य को कैसे स्वीकार करे?

chaitanya mahaprabhu
राजेश पाण्डेय, पीएच॰डी॰ !
19 Mar 2019

सवाल: क्या श्री चैतन्य महाप्रभु भगवान हैं और  इस तथ्य को कैसे स्वीकार करे कि वे भगवान हैं तथा उनके बारे क्या साक्ष्य है?

उत्तर: आध्यात्मिक जगत में किसी चीज़ की परमणिकता के बारे में ३ प्रमाण अत्यंत आवश्यक है:  प्रामाणिक गुरु, साधु तथा शास्त्र। गुरु और साधु एक ही बात बताते हैं जो शास्त्र कहता है इसीलिए शास्त्र प्रमाण सर्वोपरि  है। यहाँ पर उल्लिखित शास्त्रों में श्री चैतन्य महाप्रभु के अवतरण की भविष्यवाणियां दी गई  हैं:

कलियुग में बुद्धिमान लोग, कृष्ण-नाम के भजन में निरंतर रत रहने वाले अवतार की पूजा संकीर्तन द्वारा करते हैं । यद्यपि वे श्यामवर्ण के नहीं हैं, परन्तु वे स्वयं कृष्ण हैं।  (भागवत ११.५.३२)


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प्रारंभिक लीलाओं में वे स्वर्णिम वर्ण के एक गृहस्थ के रूप में प्रकट होते हैं । उनके प्रत्यंग सुन्दर हैं और चन्दन का लेप लगाये हुए वे तप्तकांचन के समान दिखते हैं । अपनी अंत की लीलाओं में उन्होंने संन्यास स्वीकार किया, एवं वे सौम्य एवं शांत हैं । वे शांति एवं भक्ति के उच्चतम आश्रय हैं क्योंकि वे मायावादी अभक्तों को भी शांत कर देते हैं। (महाभारत: दान-धर्म पर्व, अध्याय १८९)
 
मैं नवद्वीप की पावन भूमि पर माता शचिदेवी के पुत्र के रूप में प्रकट होऊंगा। (कृष्ण यमल तंत्र)
 
कलियुग में जब संकीर्तन आंदोलन का उदघाटन होगा तब मैं सचिदेवी के पुत्र के रूप में अवतरित होऊंगा। (वायु पुराण)
 
कभी कभी मैं स्वयं एक भक्त के वेश में उस धरातल पर प्रकट होता हूँ ‘। विशेष रूप से कलियुग में मैं सची देवी के पुत्र के रूप में संकीर्तन आंदोलन आरम्भ करने के लिए प्रकट होता हूँ। (ब्रह्म यमल तंत्र)
 
हे महेश्वरी ! स्वयं परम पुरुष श्री कृष्ण, जो राधारानी के प्राण एवं जगत के सृष्टिकर्ता, पालक एवं विध्वंसक हैं, गौर के रूप में प्रकट होते हैं। (अनंत संहिता)
 
परम पुरुषोत्तम भगवान, परम भोक्ता, गोविन्द जिनका रूप दिव्य है, जो त्रिगुणातीत हैं, जो सभी जीवों के हृदय में विद्यमान सर्व्यापक परमात्मा हैं, वे कलियुग में दोबारा प्रकट होंगे। परम-भक्त के रूप में, परम पुरुषोत्तम भगवान गोलोक वृन्दावन के समान, गंगा के तट पर नवद्वीप में द्विभुज सुवर्णमय रूप ग्रहण करेंगे । वे विश्वभर में शुद्ध-भक्ति का प्रचार करेंगे। (चैतन्य उपनिषद ५)

कलियुग की प्रथम संध्या में परम पुरुषोत्तम भगवान सुवर्णमय रूप ग्रहण करेंगे । सर्प्रथम वे लक्ष्मी के पति होंगे तत्पश्चात वे संन्यासी होंगे जो जगन्नाथ पुरी में निवास करेंगे। (गरुड़ पुराण)
 
कमल रूपी नगर के मध्य में स्थित मायापुर नामक एक स्थान है और मायापुर के मध्य में एक स्थान है, अंतर्द्विप। यह परम पुरुषोत्तम भगवान, श्री चैतन्य का निवास स्थान है। (छान्दोग्य उपनिषद)
 
कलियुग के प्रारम्भ में, मैं अपने सम्पूर्ण एवं वास्तविक आध्यात्मिक स्वरूप में, नवद्वीप-मायापुर में सचिदेवी का पुत्र बनूँगा। (गरुड़ पुराण)


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परम पुरुषोत्तम भगवान इस संसार में दोबारा प्रकट होंगे । उनका नाम श्री कृष्ण चैतन्य होगा और वे भगवान के पवित्र नामों के कीर्तन का प्रचार करेंगे।(देवी पुराण)
 
परम पुरुषोत्तम भगवान कलियुग में दोबारा प्रकट होंगे । उनका रूप स्वर्णिम होगा, वे भगवान के पवित्र नाम कीर्तन में आनंद लेंगे और उनका नाम चैतन्य होगा। (नृसिंह पुराण)
 
कलियुग के प्रथम संध्या में मैं गंगा के एक मनोरम तट पर प्रकट होऊंगा । मैं सचिदेवी का पुत्र कहलाऊंगा और मेरा वर्ण सुनहरा होगा।  (पद्म पुराण)
 
कलियुग में मैं भगवान् के भक्त के वेश में प्रकट होऊंगा और सभी जीवों का उद्धार करूँगा। (नारद पुराण)
 
 
पृथ्वी पर कलियुग की प्रथम संध्या में, गंगा के तट पर मैं अपना नित्य सुवर्णमय रूप प्रकाशित करूँगा। (ब्रम्ह पुराण)
 
इस समय मेरा नाम कृष्ण चैतन्य, गौरांग, गौरचंद्र, सचिसुत, महाप्रभु, गौर एवं गौरहरि होगा । इन नामों का कीर्तन करके मेरे प्रति भक्ति विकसित करेंगे। (अनन्त संहिता)

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