मैं कौन हूँ का एहसास कैसे हो?

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राजेश पाण्डेय, पीएच॰डी॰ !
23 Feb 2019

प्रश्न: मेरी वास्तविक आंतरिक पहचान जो परमेश्वर से आता है, मैं अपने सच्चे व्यक्तित्व की तलाश कर रहा हूं। मुझे आपका कौन सा सलाह है कि मैं कौन हूँ का एहसास हो?

 

उत्तर: यह बहुत सरल है कभी-कभी हम यह तय करने की कोशिश करते हैं कि सही शिक्षक कौन है या सर्वोत्तम शिक्षक कौन है हमें बाह्य रूप से इतनी सोचनें करने की आवश्यकता नहीं है इसके बजाय, हमें अपने जीवन में और अधिक गंभीर होने की कोशिश करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए। जैसा कि हम अपने जीवन में अधिक गंभीर होते जा रहे हैं। भगवान हमें उस तरह के शिक्षक से जुड़वाएगा जो हमें अगले चरण में ले जानें में मदद कर सकते है। बाह्य रूप से इतना चिंता मत करो अपनी खुद की चेतना में गंभीर हो। दिल से पुकारो और वह स्वाभाविक और स्वत: रूप से एक गुरू को आकर्षित करेंगें जो आपके मार्गदर्शन करने और वर्तमान परिस्थिति में आपकी सहायता करने में सक्षम होंगे। कई विभिन्न प्रकार के गुणवत्ता और जिम्मेदारी के स्तर वाले गुरू हैं और जो विभिन्न तरीकों से मदद किये हैं। यह सिर्फ वही भगवान ही सब कुछ व्यवस्थित करते हैं।

 

भक्ति तीर्थ स्वामी, आध्यात्मिक योद्धा।

 

सदा ही भगवान के नाम का जपिए हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। और ख़ुश रहिए “परम विजयते श्रीकृष्ण संकीर्तनम” इस कलियुग में यह संकिर्तन आंदोलन (कृष्ण के पवित्र नाम का सामुहिक जाप) मानवता के लिए प्रमुख वरदान है।

 

हरे कृष्ण

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