श्री जय जय गौर आरती ।

vedashindi
Pankaj !
26 Jan 2019

श्री जय जय गौर आरती । 

 

जय जय गोराचाँदेर आरति को शोभा ।

जाह्नवी - तटवने जगमन - लोभा II1 ॥

 

दक्षिणे निताइचाँद , बामे गदाधर ।

निकटेअद्वैत श्रीनिवास छत्रधर ॥ 2 ॥

 

बसियाछे गोराचाँदरत्नसिंहासने ।

आरति करेन ब्रह्मा - आदिदेवगणे ॥ 3 ॥

 

नरहरि आदिकरि ' चामर ढुलाय ।

सञ्जयमुकुन्द - वासुघोष - आदि गाय | | 4 | |

 

शंख बाजे घण्टा बाजे , बाजे करताल ।

मधुरमृदंग बाजे , परम रसाल ॥ 5 ॥

 

बहुकोटिचन्द्र जिनिवदनउज्ज्वल ।

गलदेशेवनमाला करेझलमल ॥ 6 ॥

 

शिव - शुक – नारद प्रेमे गदगदा ।

भकतिविनोद देखे गोरार सम्पद ॥ 7 ॥

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