अध्याय दो
श्लोक

नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः ।
उभयोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्त्वदर्शिभिः ॥१६॥

शब्दार्थ :

- नहीं; असतः - असत् का; विद्यते - है; भावः - चिरस्थायित्व; - कभी नहीं; अभावः - परिवर्तनशील गुण; विद्यते - है; सतः - शाश्र्वत का; उभयोः - दोनो का; अपि - ही; दृष्टः - देखा गया; अन्तः - निष्कर्ष; तु - निस्सन्देह; अनयोः - इनक; तत्त्व - सत्य के; दर्शिभिः - भविष्यद्रष्टा द्वारा ।

भावार्थ :

तत्वदर्शियों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि असत् (भौतिक शरीर) का तो कोई चिरस्थायित्व नहीं है , किन्तु सत् ( आत्मा ) अपरिवर्तित रहता है। उन्होंने इन दोनों की प्रकृति के अध्ययन द्वारा यह निष्कर्ष निकाला है ।